शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

झुठी मुस्कान

कभी देखो किसी को हंसते हुए

क्या जहन में आता है तुम्हारे

लगता है खुश है वो

शायद अपने गमों को

छुपाने की भरसक कोिशश करने का

प्रयास किये जा रहा है

कोई उसके गमों को जान भी न पाए

इस सोच में

अपने चेहरे पर खुशी की झुठी मुस्कान बिखरने की

हर सम्भव कोिशश

करना चाहता है

शायद वो कामयाब भी है

अपनी झठी हंसी को दिखाने में

वो नहीं चाहता होगा

कोई उसे भी

उसकी हंसी की तरह

झुठी दिलासा दे

वो ये भी जानता है कि कोई उसके

गमों में सरीक नहीं हो सकता

गमों को बांट नहीं सकता

फिर वो किसी से क्या उम्मीद रखें

गम को बांटने में

आज हर वस्तु का बांटवारा

घर, जमीन, धन-दौलत,

आज का नारा

ये तेरा और ये मेरा

सिर्फ वस्तु का बटवारा

गमों का कोई सारथी नहीं

बनना चाहेगा

गमों को सिर्फ और सिर्फ झुठी मुस्कान के साथ

जीया जा सकता है

क्योंकि लोग आज अपने दु:ख से दु:खी नहीं

लोगों के सुख से दु:खी है

इसी कारण वो

अपने चेहरे पर

कभी गम के परछाई भी

नहीं दिखता।

5 टिप्पणियाँ:

Blogger shama ने कहा…

Tahe dilse swagat hai!

30 जनवरी 2010 को 7:08 am बजे  
Blogger kshama ने कहा…

Sasneh swagat hai!

30 जनवरी 2010 को 10:57 am बजे  
Blogger mastkalandr ने कहा…

गमों को सिर्फ और सिर्फ झुठी मुस्कान के साथ
जीया जा सकता है
क्योंकि लोग आज अपने दु:ख से दु:खी नहीं
लोगों के सुख से दु:खी है
इसी कारण वो
अपने चेहरे पर
कभी गम के परछाई भी
नहीं दिखता।...
वाह वाह बहुत सही फ़रमाया आपने मित्र ..
आज कल लोगों के जीने का अंदाज़ ही कुछ ऐसा है .
नकली चेहरा सामने आए असली सूरत छुपी रहे
ऐसा लगता है अपने ज़मीर को ही धोका दे रहे है लोग ..
मैंने एक विडियो अपलोड किया था यूट्यूब पर आप् भी देखिए लिंक भेज रह हूँ... मक

http://www.youtube.com/watch?v=XOHPLghl9tk

http://www.youtube.com/mastkalandr

30 जनवरी 2010 को 12:21 pm बजे  
Blogger Yogesh Verma Swapn ने कहा…

Blogjagat me swagat hai!, sunder rachna hai.

31 जनवरी 2010 को 1:27 am बजे  
Blogger अजय कुमार ने कहा…

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

31 जनवरी 2010 को 9:54 pm बजे  

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