गुरुवार, 18 मार्च 2010

दोस्त कहना ही दोस्ती नहीं होती

दूरियों से फर्क पड़ता नहीं


बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है

दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है

वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है

दिल से खेलना हमे आता नहीं

इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए

शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें

इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए

लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है,

कोई करता है तो इल्जाम देते है।

कहते है पत्थर दिल रोया नही करते,

और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है।

भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,

हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,

बात कहके तो कोई भी समझलेता है,

पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और है...!

मुस्कराना ही ख़ुशी नहीं होती,

उम्र बिताना ही ज़िन्दगी नहीं होती,

दोस्त को रोज याद करना पड़ता है,

क्योकि दोस्त कहना ही दोस्ती नहीं होती

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