रविवार, 11 अप्रैल 2010

मृत्यु की सच्चाई

मृत्यु के अलग अलग प्रकार परन्तु रूप एक


मृत्यु इंसान को विभिन्न प्रकार से मारती है

• किसी बीमारी के चलते होने वाली मौत

• दुघटना से होने वाली मौत

• पैदा होते समय हुई मौत

• किसी के द्वारा किसी अस्त्र के प्रयोग से मौत

• स्वयं ही अपनी जीवन लीला समाप्त करना

• वृद्धावस्था से होने वाली मौत

आदि प्रकार से मनुश्यों को मौत आती है परन्तु विभिन्न प्रकार से होने वाली मौत का रूप एक ही है वह है मृत्यु।

मृत्यु की सच्चाई

मृत्यु एक ऐसा सत्य है जिसे आज तक दुनियां में कोई भी भगवान से लेकर जानवर तक नही झूठला सका है। वह किसी न किसी माघ्यम से उसे अपने आगोस में ले लेती है परन्तु कारण किसी न किसी को बनना पड़ता है।

किसी इंसान की मृत्यु के बाद इंसान ही चर्चा करते है वह इस प्रकार से मौत का ग्रास बन गया ,लेकिन वह यह नहीं समझते की कारण तो केबल एक ही है वह है मौत। जन्म को तो सब देखते है परन्तु मौत को केबल वहीं इंसान देख पाता है जिसकी मृत्यु हो रही होती है।

मृत्यु का आसान तरीका

मृत्यु का एक मात्र तरीका है वह है चिन्तन मन से मृत्यु की अराधना करना जिस व्यक्ति ने मृत्यु की सच्चे मन से अराधना कर ली हो उसकी मृत्यु या फिर यह कहों कि उसको अपने प्राण त्यागने में कोई भी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। वैसे देखा गया है कि जब मनुश्य अपने जीवन के अन्तिम छडों में होता है और वह कश्ट छेल रहा होता है तो उसे उतना ही प्यार मौत से ठीक उतनी ही नफरत जीवन से होने लगती है।

परिभाशा

जीवन को हर प्राणी परिभाशित कर सकता है परन्तु मौत को कोई भी परिभाशित नहीं कर सकता है। क्योंकि जीवन जीने की कला है क्या यह कहें की मृत्यु मरने की कला है। मृत्यु तो केवल प्रभू के चरणों में अपना स्थान पाने का तरीका है अब लोग यह भी कह सकते है कि एक आदमी 150 साल जीवन जीता है वहीं दूसरा जन्म लेने के बाद या फिर जन्म लेते वक्त ही मर जाता है इसे क्या कहेगे। यह सब मनुश्य के भाग्य के ऊपर नहीं है जिस मनुश्य की प्रभू को जिस समय अवश्यकता पड़ने लगती है वह उसे उसी अवस्था में बुला लेता है और उसे जाना ही पड़ता है वह किसी भी प्रकार से आग्रह नहीं कर सकता या फिर वह समय नहीं मांग सकता कि मैं कल आऊगा या 10-15 मिनट के बाद आऊगा , उसे तो जाना ही पड़ता है

लोगों ने देखा होगा कि जो इंसान जितने अच्छे कर्म करता है उसे ही प्रभु अपने पास बुला लेता है और जो जितने बुरे कर्म करता है उसे उतनी ही देर में बुलाते है क्योंकि उस प्रभु के दरवार में अच्छे लोगों की कमी है देखा जाये तो इस संसार में बुरे लोगों का जमघट लगा रहता है कोई आता है कोई आने की कोिशश करता है जाने का कोई नाम ही नहीं लेता चाहिता।

मृत्यु की परिभाशा मेरे अनुसार तो मृत + यु से बना है मृत का मतलब मरा हुआ यु का मतलब तुम ं।

जब कोई िशशु जन्म लेता है तो उसे हमें रोक सकते है उसका इस संसार में पैदा होना रोक सकते है या फिर यूं कहे उसका गर्भ पात करके उस बच्चें को जन्म नहीं लेने दे सकते हैं ठीक इसके विपरीत जब कोई इंसान या फिर कोई भी जीवित प्राणी हो अगर वह मरने वाला है तो कोई भी लाख कोिशश कर ले उसे इस संसार से जाने से नहीं रोक सकता , उसे तो जाना ही पडे़गा, कोई कुछ भी नहीं कर सकता।

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